- एक्ट्रेस कावेरी प्रियम ने महाकाल की भस्म आरती में की पूजा: बोलीं- यहां की ऊर्जा अद्भुत, 3 साल से आ रहीं उज्जैन!
- स्वस्ति वाचन से खुले पट; भांग-चंदन और पुष्पों से हुआ दिव्य श्रृंगार, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
- महाकाल की भस्म आरती में केंद्रीय मंत्री और क्रिकेटर पहुंचे: धर्मेंद्र प्रधान-उमेश यादव ने किया जलाभिषेक, दोनों ने लिया भगवान का आशीर्वाद
- 21 दिन बाद पहुंचा कनाडा में मारे गए छात्र गुरकीरत का पार्थिव शरीर: CM मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि, सरकार ने उठाया 40-50 लाख का खर्च
- महाकाल पर आज से शीतल जलधारा शुरू, 29 जून तक निरंतर चलेगी शीतल धारा
कार्तिक मेला: झूलों और दुकानों पर अंधेरा, नल कनेक्शन भी नहीं
उज्जैन | नगर निगम की ओर से आयोजित परंपरागत कार्तिक मेले का सोमवार को आधी-अधूरी तैयारियों के बीच शुभारंभ हुआ। मेले के पहले दिन हजारो लोग इसका आनंद लेने पहुंचे बावजूद कमजोर तैयारियों के कारण इसकी चमक फीकी रही। कई दुकान, झूले-चकरी, ठेले आदि पर शुभारंभ के दिन तक लाइट की व्यवस्था नहीं हो पाई। इसके अलावा कई जगह पानी के लिए भी परेशान होना पड़ा। हालंाकि एक-दो दिन में मेला अपनी पूरी रंगत पर आने की उम्मीद है।
मेले का शुभारंभ में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा मेला हमारी संस्कृति को मजबूत करता है। गेहलोत ने मेले में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने का आह्वान भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महापौर मीना जोनवाल ने भी सिंगल यूज प्लास्टिक, पॉलीथिन का उपयोग नहीं करने और स्वच्छता बनाए रखने की बात कही। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक पारस जैन, निगम अध्यक्ष सोनू गहलोत, प्रभारी निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी संबोधित किया। शुरुआत में अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर मेले का शुभारंभ किया। गायत्री शक्तिपीठ के स्वयंसेवकों द्वारा दीप यज्ञ आयोजित किया गया। संचालन जनसंपर्क अधिकारी ने किया, आभार अपर आयुक्त मनोज पाठक ने माना।
ग्रामीणों ने लिया मेले का आनंद
चतुर्दशी के अवसर पर क्षिप्रा में स्नान करने के लिए सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु शहर पहुंचे। स्नान व देवदर्शन के बाद दोपहर से ही ग्रामीणों का कार्तिक मेले में आना शुरू हो गया था। दोपहर से रात तक हजारों लोगों ने मेले में पहुंच झूले-चकरी, मीना बाजार, फूड जोन आदि का आनंद लिया। हालांकि सभी दुकान-झूलों पर बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई थी।